तन्हाई
बेवजह सा जी रहा हूँ |
कोई मकसद न मंजिल हैं
राहों में हु खड़ा अकेला
कहा जाऊ बड़ी मुश्किल हैं .................|
हर सांसे बेजान सी लगती है
तेरे बगैर जिंदगी सुनसान सी लगती है
चाहा है तुझे जान से ज्यादा
फिर भी ...............
तु हर वक्त परेशां सी लगती है |
सुना है रास्ता तेरे बगैर
मंजिल नजर नहीं आता
चाहा है तुझे बड़ी शिद्दत से
पर तु है कि तुझे मुझ पर रहम नहीं आता ....................,
हर सांसे बेजान सी लगती है
तेरे बगैर जिंदगी सुनसान सी लगती है
चाहा है तुझे जान से ज्यादा
फिर भी ...............
तु हर वक्त परेशां सी लगती है |
सुना है रास्ता तेरे बगैर
मंजिल नजर नहीं आता
चाहा है तुझे बड़ी शिद्दत से
पर तु है कि तुझे मुझ पर रहम नहीं आता ....................,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें