" मोहब्बत का एक और पहलू "


" मोहब्बत का एक और पहलू "



वो मोड़ आ ही गया दोस्तों
जहा से मैंने शुरुआत की थी
बेपनाह चाहत के चक्कर
अपनी जिंदगी बर्बाद की थी
सोचा था मैंने वो ताकत बनेगी मेरा
पर न पता था मुझको की.....
वही मेरी सफलता की रूकावट होगी
कितना दर्द होता है जब ये सोचता हु
अपने पुराने दिनों को
रातो की नींदे कही गुम सी जाती है
मन में बेचैनी और तड़प सी रहती है
मै किसी को इसका जिम्मेदार नहीं मानता दोस्तों

क्यों ये फैसला सिर्फ मेरा था सिर्फ मेरा 



                                     दिल की कलम से .........|

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